What are alternative of petrol पेट्रोल के विकल्प क्या हैं:

पिछले कुछ सालों में पेट्रोल के दाम जितनी तेजी से बढ़े हैं। लोगों ने अपना ध्यान सीएनजी की तरफ करना शुरू कर दिया है। हालांकि सीएनजी के दामों में भी कोई खास गिरावट नहीं आई है। अब तो ऐसा लगने लगा है कि पेट्रोल और डीजल रेट के मामले में एक दूसरे को कंपटीशन देते हैं। एक तरफ देश की जनता पेट्रोल डीजल के दामों पर डिस्कशन कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ Ethanol blending की आजकल खूब चर्चा हो रही है। देश में कई जगह तनाव प्लैनेट पेट्रोल बनना शुरू हो गया है।


Ethanol blending

अब सवाल ये है कि आखिर ये Ethanol blending है क्या? इससे वाहन कैसे चल पाएंगे। क्या ये किफायती होगा? और अगर आप सरकार से क्या आपसे मूल्य करेंगी? बस इन्हीं सवालों के जवाब आज हम आपको देंगे। मौजूदा दौर में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के बढ़ते दामों को देखते हुए सरकार नए नए विकल्पों पर काम कर रही है govt. का एक ही उद्देश्य है, देश की जनता को महंगाई की मार से किसी तरह बचाना है और अब इसी कड़ी में चुनाव ब्रैंडेड पेट्रोल की शुरुआत की गई है। दरअसल इथेनॉल मतलब इथाइल अल्कोहल होता है जो बायोमास यानी जैविक पदार्थों से बनाई धन होता है। इसका इस्तेमाल शराब में होता है। Ethanol  की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसका आप टोल नंबर गैसोलीन यानी नोबल पेट्रोल से ज्यादा होगा। यही कारण है कि इसे पेट्रोल से भी ज्यादा कारगर माना गया है। वैसे तो इतना हो तो गाड़ियों में ईधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए वाहनों के इंजन में काफी बदलाव करना होगा। ऐसे में पिछले काफी वक्त से इस पर शोध चल रहा था, जिसका नतीजा अब जाकर निकला है। नतीजा कहता है कि अगर इथेनॉल में पेट्रोल मिलाकर इसका गाड़ियों में इस्तेमाल किया जाए तो ये काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। देश में इसका उपयोग कई जगह पर शुरू भी हो गया है। सवाल ये है कि इसका वाहनों पर क्या असर होगा। बताया जा रहा है कि पेट्रोल में Ethanol मिलाने पर गाड़ी पर कोई असर नहीं पड़ता। क्योंकि उसमें ऑक्सीजन मिली होती है। इससे ईंधन को पूरी तरह जलने में मदद मिलती है और उससे उत्सर्जन कम होता है। सबसे रोचक बात ये है कि ये पर्यावरण के लिए बहुत बेहतरीन बन जाता है। हालांकि ऐसा भी माना जाता है कि इसकी प्रॉपर्टी में कुछ बदलाव आ सकते हैं। अब जब इस मिश्रण का इस्तेमाल करना शुरू किया जा रहा है तो आपके लिए ये जानना भी जरूरी है कि कितने पेट्रोल में कितना इथेनॉल मिलना चाहिए। फिलहाल की बात करें तो देश में कई जगह पेट्रोल में 5 से 10% एथनॉल मिलाया जा रहा है। इसकी शुरुआत वैसे तो एक या दो परसेंट से हुई थी, लेकिन अब इसे 10 परसेंट तक बढ़ा दिया गया है। आपको बता दें कि Ethanol की कीमत लगभग ₹61 लीटर तक है। ऐसे में अगर इसे पेट्रोल के साथ मिलाया जाता है तो ईंधन की कीमत काफी कम हो सकती है। गाड़ियां अच्छा एवरेज दे सकती हैं और इससे आपकी जेबें पर भी कम असर होगी। आगे कहने में आसान लग रहा है उतना जमीनी स्तर पर हो पाएगा कि यह बड़ा सवाल है। दरअसल इन दिनों बॉलीवुड पेट्रोल की कीमत पेट्रोल के साथ साथ कई और फैक्टर्स पर भी निर्भर करेगी। जैसे जैसे अलग से रखने की व्यवस्था होगी

इसकी डिलीवरी मशीन अलग से लगानी होगी। जाहिर है यह सब करने के लिए हर पेट्रोल पंप मालिक पर एक्स्ट्रा प्रेसर आ सकता है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि पेट्रोल पंप मालिक इसे अफोर्ड नहीं कर सकते। सही तरीके से इसका इस्तेमाल शुरू किया जाए तो कस्टमर्स के लिए सहूलियत होगी। फिलहाल 10 की सीमा तक रोक नहीं रखी गई है, लेकिन आने वाले वक्त में घटाई जा सकती है। वैसे यह खबर परेशान करने वाली एक और बात है जो कस्टमर्स के लिए सिरदर्द बनी हुई है। दरअसल जहां जहां पर ये एक्सपेरिमेंट शुरू किया गया वहां पर कई इलाकों में इथेनॉल की जगह पानी मिलाने की शिकायतें आईं। इसका ध्यान सभी पेट्रोल पंप मालिकों पर इतना हुआ कि कस्टमर्स के साथ चीटिंग न की जाए। दूसरी तरफ भले ही एथनॉल पेट्रोल में बहुत कम मात्रा में पानी होता है, लेकिन ये पूरी तरह से सेफ है। इसके बाद ज्यादा नुकसान नहीं है। फिलहाल ये पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पूरी तरह से पट्रोल का विकल्प है क्योंकि इसमें अभी बहुत सारे बदलाव करने होंगे। इसके साथ ही कई तरह की चुनौतियों का सामना करना होगा। यदि आप नजारा ही तनाव ब्लेंडेड पेट्रोल के बारे में


ब्लेंडेड फ्यूल

अब बात करते अन ब्लेंडेड फ्यूल की जैसा नाम नहीं समझ पा रहे होंगे। इसका मतलब होता है पेट्रोल जिसमें Ethanol blending यानी mix ना किया भारत सरकार ने 2025 तक पेट्रोल में 25 फीसदी इथेनॉल लैण्डिंग का लक्ष्य तय कर लिया है। सरकार इसके जरिये अपने तेल आयात बिल को कम करना चाहती है। मार्च 2022 तक सरकार का लक्ष्य ये था कि वो पेट्रोल में 10 फीसदी  मिलाए यानी ब्लैंड

करें। वो लक्ष्य पूरा होता नज़र आ रहा है। अब सवाल ये भी उठता है कि जब इतना बैंडेड पेट्रोल वाली गाड़ियां अगर कोई भी वाहन सड़क पर चलेगा तो इससे प्रदूषण होगा। क्या उससे पर्यावरण को नुकसान होगा। फिलहाल जितनी रिसर्च की गई है उसके हिसाब से देश में बढ़ते प्रदूषण पर रोक लगाने और दामों को कंट्रोल करने के मकसद से यही कदम उठाया गया है। सरकार साल 2003 में पाँच फीसदी एथनॉल ब्रैंडिंग के लक्ष्य के साथ इस प्रोग्राम की शुरुआत की थी। सरकार ने ये भी फैसला लिया है कि अप्रैल 2023 से यानी अगले साल से पेट्रोल में 20 फीसदी Ethanol blending शुरू कर दी जाएगी। इससे किसानों को काफी फायदा होगा। सरकार इस तरफ तेजी से काम कर रही है। सरकार का ये भी मानना है कि उनके इस कदम से पेट्रोल का खर्चा कम हो जाएगा। पैदल चाल के जरिये किसानों की आमदनी भी बढ़ जाएगी। अब आप सोच रहे होंगे कि इससे किसानों को कैसे फायदा होगा। दरअसल धान लाल कॉल यानी इतना लगभग 99 परसेंट शुद्ध होता हैं और ये कृषि उत्पादों से ही उत्पादित किया जाता है। जाहिर हैं की इसका प्रोडक्शन बढ़ेगा तो किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। देशवासियों की निर्भरता पेट्रोल पर से खत्म हो सके। इसके लिए सरकार ने कदम उठाया है, जिसकी काफी तारीफ की जा रही है। अब जरा इथेनॉल इस्तेमाल करने के फायदे भी जान लीजिए। Ethanol blending का सबसे बड़ा फायदा ये है कि जब आपकी गाड़ी में इस्तेमाल होगा तो आपका तेल पहले के मुकाबले काफी सस्ता हो जाएगा। सोचिए ये की बात कर रहे हैं। सरकार इस पर इतना जोर दे रही है क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है जो अपने 85 फीसदी से ज्यादा की मांग को पूरा करने के लिए विदेशों पर निर्भर है। जाहिर है अगर इतना ब्रैंडेड पेट्रोल से चलने वाले इंजन तैयार हो जाते हैं तो सरकार से काफी फायदा होगा। अगर भारत लगातार इस दिशा में काम करता रहा तो चौधरी और ब्राजील को टक्कर देता हुआ नजर आएगा। ब्राजील में फिलहाल 40 फीसदी गाड़ियां 100% Ethanol पर चल रही है। भारत अभी सिर्फ काम कर रहा है। इन सबके बीच आजकल आप एकाध जनसुनवाई होंगे। 


फ्लैक्स फ्यूल 

क्या ये फ्लैक्स व्यू ये भी जान लीजिए। दरअसल फ्लैक्स, फ्यूल, गैसोलीन और मेथनॉल और इथेनॉल के मिश्रण से तैयार होने वाला एक वैकल्पिक ईंधन है। कुछ वक्त पहले नितिन गडकरी ने कहा था कि आने वाले वक्त में फ्लैक्स व्यू लेजर जरूरी कर दिए जाएंगे। मौजूदा वक्त में टीवीएस मोटर और बजाज ऑटो जैसी कंपनीज ने टू व्हीलर्स के लिए फ्लैक्स व्यू लेजर बनाने शुरू कर दिए हैं। वैसे तो बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड ने सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद 1944 से ही एथनॉल पर काम करना शुरू कर दिया था। आगे उस दौर में इतना आबादी का मात्रा मिला करता था, इसीलिए उसके साथ एक्सपेरिमेंट करना मुमकिन नहीं था। अब इसकी मात्रा बढ़ी है तो पावर अल्कोहल के नाम से जाने जाने वाले इनधन को सरकार सही से इस्तेमाल करने पर जोर दे रही है। Ethanol कितना काम की चीज है। इसका पता तो आठ दशक पहले लग गया था, लेकिन इसका इस्तेमाल इस तरह से किया जा सकता है कि यह सब नितिन गडकरी जी के नेतृत्व में हो सकता है। वैसे जब ये पूरी तरह से लागू हो जाएगा तो उम्मीद है कि आप कोई चुनाव बैंडेड पट्रोल ₹62 प्रति लीटर मिल सकेगा। निश्चित तौर पर एक बड़ी राहत होगी।


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